आपने अक्सर लोगों से सुना होगा कि दिन की झपकी लिए बिना उन्हें आराम नहीं मिलता। इस श्रेणी में ज्यादातर घर पर रहने वाली महिलाएं, पुरुष, बच्चे, या बुजुर्ग आते हैं। इस झपकी की टाइमिंग हर व्यक्ति के हिसाब से अलग हो सकती है, लेकिन आमतौर पर यह आधे घंटे से दो घंटे तक की मानी जाती है। कई लोगों को इस झपकी से इतनी राहत और ऊर्जा मिलती है कि अगर वे किसी दिन इसे मिस कर दें, तो बीमार महसूस करने लगते हैं। कुछ लोगों के लिए यह सुबह जल्दी उठने पर अधूरी नींद को पूरा करने का एक जरिया होती है। वास्तव में, एक संतुलित नींद शरीर ही नहीं, पूरे दिमाग के लिए भी जरूरी होती है। हर व्यक्ति की नींद की जरूरत अलग-अलग हो सकती है, पर आमतौर पर शांत घंटे की नींद को अच्छा माना जाता है।
लेकिन कई बार नौकरी, परिवार, या अन्य जिम्मेदारियों के चलते लोगों को सुबह जल्दी उठना पड़ता है। ऐसे में दोपहर की एक झपकी उनके लिए जरूरी हो जाती है। काम के बढ़ते समय, भागदौड़ भरी जिंदगी और तनाव से भरे माहौल में दिन की झपकी कई बार ताजगी का काम करती है। इसलिए आज हम आपको दोपहर में सोने के कुछ बेहद ही जबरदस्त फायदे बताने जा रहे हैं।
केवल शरीर ही नहीं, छोटी सी झपकी आपके दिमाग को भी आराम पहुंचाती है। दिन की करीब एक घंटे की झपकी पूरे शरीर की मांसपेशियों को रिलैक्स होने का मौका देती है। यही कारण है कि झपकी के साथ शरीर और दिमाग को आराम मिल जाता है और उठने पर आप ताजगी महसूस करते हैं। कई बार ऐसा होता है कि सफर के बाद या रात को किसी पार्टी से देर घर आने पर आपकी नींद पूरी नहीं हो पाती है। ऐसे स्थिति में दोपहर की झपकी आपकी थकान को मिटाने का काम कर सकती है।
जिन्हें दिन में झपकी लेने की आदत होती है, खासकर घरेलू महिलाओं को, उनके पीछे एक बड़ी वजह होती है – सुबह जल्दी उठकर घर का काम संभालना और देर रात तक काम में लगे रहना। इसी वजह से जब वे दिन की झपकी के बाद उठती हैं, तो थकान दूर हो चुकी होती है। जिन लोगों का रूटीन एकदम घड़ी के हिसाब से चलता है, जैसे कि सुबह जल्दी उठकर काम पर जाने वाले लोग या स्कूल जाने वाले बच्चे, उनमें दोपहर की झपकी अलर्टनेस बढ़ाने का काम करती है। कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें भरपूर नींद ना मिलने पर चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग, और व्यवहार में बदलाव जैसी समस्याएं होती हैं। अगर वे दिन में झपकी ले लें, तो उनका मूड अच्छा हो जाता है। यह ठीक वैसा ही है जैसे कई लोगों में चाय ना मिलने के कारण सिरदर्द हो जाता है।
एक छोटी-सी झपकी याददाश्त पर भी अच्छा असर डालती है। इसके अलावा, यह निर्णय लेने की क्षमता और हर काम को करने की दक्षता पर भी अच्छा असर डालती है। इसलिए दोपहर की झपकी का असर बच्चों पर सबसे ज्यादा अच्छा देखने को मिलता है, खासकर वे बच्चे जो सुबह जल्दी उठकर स्कूल जाते हैं।
आज की लाइफस्टाइल में आए बदलावों के चलते दिन की झपकी कई लोगों के लिए जरूरी बन गई है। हालांकि, हमारे पारंपरिक तरीकों में दिन की नींद हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं मानी जाती थी। पुराने वैद्य कहा करते थे कि दिन में सिर्फ बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, या बीमार लोग ही सो सकते हैं या आराम कर सकते हैं।
अगर आप झपकी लेने जा रहे हैं, तो इन बातों का ख्याल जरूर रखें:
- आधे घंटे से ज्यादा देर की झपकी ना लें। इससे आपके शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक पर गलत असर पड़ सकता है।
- कोशिश करें कि रात को ही भरपूर नींद लें।
- दोपहर में तीन बजे के बाद ना सोएं। यह बात बच्चों पर भी लागू होती है। अगर आपका बच्चा स्कूल से तीन बजे के बाद घर लौटता है, तो उसे रात में जल्दी सोने की आदत डालें, बजाय दिन में सुलाने के।
- जब भी झपकी लें, आपके आसपास का माहौल शांत और आरामदायक होना चाहिए, ताकि आप पूरी तरह सुकून के साथ सो सकें। इससे आपके दिमाग को पूरा आराम मिलेगा और उठने पर आप तरोताजा महसूस करेंगे।
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