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आध्यात्मिक/धार्मिक

कर्म के हिसाब से अगला जन्म कैसा होगा?

कर्म के हिसाब से अगला जन्म कैसा होगा?

News Desk
Last updated: June 16, 2024 2:30 pm
News Desk Published June 16, 2024
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गरुड़ पुराण के अनुसार, हर जीव का पुनर्जन्म होता है, अर्थात् वह फिर से जन्म लेता है। नमस्कार मित्रों, यदि आप श्री कृष्ण के भक्त हैं तो कमेंट बॉक्स में ‘जय श्री कृष्णा’ लिखिए। गरुड़ पुराण के मुताबिक, मृत्यु के बाद मनुष्य को कौन सा जन्म मिलेगा, यह उसके पूर्व जन्म के कर्मों पर निर्भर करता है। अधिकांश लोगों में अगले और पिछले जन्म के बारे में जानने की उत्सुकता होती है। लोगों के मन में जिज्ञासा होती है कि वे मनुष्य बनेंगे या पशु, या फिर कीड़े-मकोड़े। यदि इंसान बनेंगे, तो कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि वे महिला के रूप में जन्म लेंगे या पुरुष के रूप में।

हिंदू धर्म में उल्लेख मिलता है कि जो इंसान जन्म लेता है उसकी मृत्यु अवश्य होती है। परंतु क्या आप जानते हैं कि मनुष्य मरने के बाद कौन सी योनि में जन्म लेता है? गरुड़ पुराण हिंदू धर्म के महापुराणों में से एक है। इसमें जन्म, मृत्यु और मृत्यु के बाद की घटनाओं का विस्तारपूर्वक वर्णन मिलता है। इस पुराण में ऐसी कई बातें बताई गई हैं जिन्हें अपनाने से व्यक्ति अपने जीवन की स्थिति सुधार सकता है। गरुड़ पुराण बहुत महत्त्वपूर्ण है, जो कि सनातन धर्म में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद पढ़ा जाता है। गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु और गरुड़ पक्षी के बीच बातचीत को बताया गया है, साथ ही इसमें व्यक्ति के चरित्र के बारे में भी बताया गया है।

ईश्वर की दृष्टि में अच्छे कर्म यानी पुण्य और बुरे कर्म यानी पाप होते हैं। गरुड़ पुराण और कठोपनिषद में उल्लेख मिलता है कि मनुष्य धरती पर जो कुछ भी पाप करता है, उन सभी पापों की सजा बारी-बारी से मिलती है। गरुड़ पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति अच्छे कर्म करता है उसे स्वर्ग में स्थान मिलता है, वहीं बुरे कर्मों के लिए नर्क का सामना करना पड़ता है। आज हम आपको इसी के बारे में बताने जा रहे हैं।

मनुष्य के अगले जन्म को लेकर विभिन्न योनियों का वर्णन:

  1. कछुआ की योनि: माता-पिता को कष्ट पहुंचाने वाली संतान या भाई-बहन को प्रताड़ित करने वाले मनुष्य कछुआ की योनि में जन्म लेते हैं। कछुए का जीवनकाल बहुत लंबा होता है, लगभग 200 से 300 वर्षों का।
  2. स्त्री का जन्म: यदि कोई पुरुष महिलाओं जैसा आचरण करता है तो अगले जन्म में स्त्री का रूप मिलता है।
  3. बंदर की योनि: अपने मालिक का विश्वास तोड़ने वाला व्यक्ति बंदर की योनि में जन्म लेता है।
  4. गधे की योनि: अपने सच्चे मित्र का अपमान करने वाला व्यक्ति गधे की योनि भोगता है।
  5. कुत्ते की योनि: धर्म का अपमान करने वाले, पूजा-पाठ न करने वाले व्यक्ति कुत्ते की योनि में जन्म लेते हैं।
  6. कीड़े-मकोड़े की योनि: दूसरों की निंदा करने वाला व्यक्ति कीड़े-मकोड़े के रूप में जन्म लेता है।
  7. छछुंदर की योनि: सुगंधित पदार्थ की चोरी करने वाला व्यक्ति छछुंदर के रूप में जन्म लेता है।
  8. उल्लू की योनि: चालाकी से दूसरों को मूर्ख बनाकर ठगने वाले लोग उल्लू की योनि में जन्म लेते हैं।
  9. भेड़िया, कुत्ता, सियार, गिद्ध, कौवा, और बगुला: पराई स्त्री से संबंध बनाने वाला व्यक्ति इन योनियों में जन्म लेता है।
  10. बकरे की योनि: गाली-गलौज करने वाला व्यक्ति बकरे की योनि में जन्म लेता है।
  11. मूर्ख और कूबड़: स्त्री की हत्या, गर्भपात या गाय की हत्या करने वाला व्यक्ति मूर्ख और कूबड़ के रूप में जन्म लेता है।
  12. कौआ: अपने बड़े भाई का अपमान करने वाला व्यक्ति कौआ के रूप में जन्म लेता है।

धर्म ग्रंथों के अनुसार, जीवन-मरण और अगला जन्म सब कुछ कर्मों के आधार पर ही तय होता है। अच्छे कर्म करने से आत्मा मुक्ति के मार्ग की ओर अग्रसर हो सकती है, जबकि बुरे कर्म करके स्थिति को भविष्य में बदतर बना सकती है। मनुष्य जन्म कितना दुर्लभ है, यह समझने के लिए हमें अपने कर्मों को सुधारना चाहिए और ईश्वर की भक्ति करनी चाहिए।

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