दुर्ग ज़िले के रिसाली स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सैकड़ों की संख्या में पेरेंट्स एकजुट हुए और आज स्कूल घेराव कर जमकर नारेबाजी की। स्कूल परिसर में पहुंचने पर प्रबंधन ने गेट बंद रख जिससे घंटों इंतजार करते रहे।पेरेंट्स के द्वारा अध्यनरत बच्चों की सुरक्षा सहित कुछ अन्य मुद्दों को लेकर यह प्रदर्शन किया गया। इस दौरान एएसपी सुखनंदन राठौर पुलिस बल के साथ उपस्थित रहे।वी वांट जस्टिस के नारे के साथ सभी पेरेंट्स स्कूल में अध्यनरत बच्चों की सुरक्षा को लेकर दडीपीएस स्कूल के प्रिंसिपल प्रशांत वशिष्ठ के समक्ष सवाल उठाते रहे।

आपको बता दें कि डीपीएस स्कूल में अध्यनरत छात्र-छात्राओं के पालक आज सुबह भिलाई निवास के समक्ष एकत्रित हुए।यहां से संगठित होकर डीपीएस रिसाली स्कूल के मुख्य द्वार के समक्ष पहुंचे, परंतु स्कूल में तैनात सुरक्षाकर्मियों के द्वारा भारी संख्या में आए हुए पेरेंट्स को देखकर अंदर जाने से रोका गया, तब पेरेंट्स ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी।पेरेंट्स के आक्रोश को देखने के बाद स्कूल प्रबंधन के द्वारा उन्हें स्कूल परिसर के अंदर आने की अनुमति दी गई।स्कूल के भीतर पहुंचते ही पेरेंट्स द्वारा नारेबाजी करते हुए स्कूल के प्राचार्य प्रशांत वशिष्ठ के साथ अध्यनरत बच्चों की सुरक्षा को लेकर के चर्चा की मांग की गई।काफी इंतजार के बाद सैकड़ो की संख्या में एकत्रित पेरेंट्स के समक्ष प्राचार्य प्रशांत वशिष्ठ आए और वह चर्चा के लिए तैयार हुए।पुलिस प्रशासन की उपस्थिति में स्कूल प्रबंधन एवं पेरेंट्स दोनों ही पक्षों के मध्य चर्चा जारी है।दरअसल 5 जुलाई की यह घटना है।बताते हैं, स्कूल की आया मासूम को लेकर टॉयलेट करने गई थी।उसे वॉश रुम में छोड़कर वह दूसरे कामों में व्यस्त हो गई।कुछ देर बाद रोते हुए बच्ची वॉश रुम से बाहर आई, तब स्कूल वालों का ध्यान गया।इसी बीच स्कूल की छुट्टी हो गई।स्कूल प्रबंधन ने बच्ची को उसे लेने आई कार में बिठाकर घर भेज दिया।इस पूरे मामले में स्कूल प्रबंधन के द्वारा किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं किए जाने का आरोप भी लगाया गया।इस घटना में पीड़ित बच्ची को न्याय नहीं मिलने का उल्लेख किया गया है।इसी घटना के संदर्भ को लेकर के सभी पेरेंट्स अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार स्कूल प्रबंधन के समक्ष प्रश्न खड़े कर रहे हैं।दोनों ही पक्षों के मध्य चर्चा जारी है।

वहीं डीपीएस स्कूल के प्रिंसिपल प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि घटना 5 जुलाई की बताई जा रही है, हमें 6 जुलाई को पता चला है। स्कूल में लगे सीसीटीवी फुटेज बच्चों के पेरेंट्स को दिखाया गया और बच्ची को भी स्कूल में लेडी अटेंशन को दिखाया गया,लेकिन बच्ची ने नहीं पहचाना,बच्ची को खेलने भेजा गया था,उल्टी आने के बाद बच्ची को घर भेज दिया गया। जितने भी आरोप लग रहे हैं यह सब बेगुन याद है।वहीं एडिशनल एसपी सुखनंदन राठौर ने बताया कि जब यह मामला आया था, पुलिस की टीम इसकी जांच की गई दुष्कर्म जैसा कोई भी चीज जांच में नहीं पाई गई।
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