आध्यात्मिक/धार्मिक – अतुल्य छत्तीसगढ़: संस्कृति, सौंदर्य और समृद्धि का संगम https://chhattisgarhstate.com अतुल्य छत्तीसगढ़: संस्कृति, सौंदर्य और समृद्धि का संगम Fri, 17 Jan 2025 10:03:31 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.8.2 https://chhattisgarhstate.com/wp-content/uploads/2024/02/chhattsgarh-state-2-75x75.png आध्यात्मिक/धार्मिक – अतुल्य छत्तीसगढ़: संस्कृति, सौंदर्य और समृद्धि का संगम https://chhattisgarhstate.com 32 32 Gagnai Reservoir tourism: प्रकृति की गोद में स्थित गगनई जलाशय में नौकायन का भरपूर आनंद ले सकते हैं पर्यटक https://chhattisgarhstate.com/gagnai-reservoir-tourism-tourists-can-enjoy-boating-in-gagnai-reservoir-located-in-the-lap-of-nature/ https://chhattisgarhstate.com/gagnai-reservoir-tourism-tourists-can-enjoy-boating-in-gagnai-reservoir-located-in-the-lap-of-nature/#respond Fri, 17 Jan 2025 10:03:04 +0000 https://chhattisgarhstate.com/?p=3021 Gaganai Reservoir: नवगठित जीपीएम जिला प्राकृतिक मनोरम दृश्यों से भरा-पूरा जिला है। ऐतिहासिक, धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थलों(Gagnai Reservoir tourism) से विद्यमान जिले में प्रकृति की गोद में स्थित गगनई जलाशय में पर्यटक नौकायन का भरपूर आनंद ले सकते हैं। जिला मुख्यालय गौरेला से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गंगनई जलाशय (नेचर कैंप) प्रकृति प्रेमियों के लिए खास जगहों में से एक है। यहां पर्यटकों के ठहरने और खाने-पीने के साथ ही मनोरंजन के लिए नौका विहार की सुविधा उपलब्ध है।


  स्थानीय लोगों के साथ ही बड़ी संख्या में पर्यटक अपने परिवार के साथ पिकनिक मनाने यहां पहुंचते हैं। यहाँ स्थित सन्सेट पॉइंट से झील में डूबते सूरज और चारों ओर पहाड़ों का सुंदर दृश्य यहां आने वाले पर्यटकों का मन मोह लेता है। सूरज की लालिमा झील के पानी पर पड़ती है तो दृश्य देखते ही बनता है और एक अलौकिक आनंद मिलता है। यहाँ बने झील में बोटिंग की सुविधा है। साथ ही वन विभाग द्वारा बनाए गए सर्व सुविधायुक्त कमरे भी हैं, जहां पर्यटक परिवार के साथ ठहर सकते हैं। खाने-पीने के लिए कैंटिन सुविधा भी उपलब्ध है।

ALSO READ THIS : Rakasganda Waterfall: प्राकृतिक सौंदर्य और शांति का अनुभव: यह जलप्रपात पर्यटकों की होती है पहली पसंद…. पत्थरों के बीच कलकल कर बहती जलधारा निर्मित करती है मनोरम दृश्य

          जिला प्रशासन द्वारा गठित स्थानीय पर्यटन समिति द्वारा यहां नाइट कैम्पिंग, ट्रेकिंग, पक्षीदर्शन जैसी अनेक मनोरंजक गतिविधियां संचालित की जाती है। गगनई नेचर कैंप भालूओं के रहवास वाले जंगल के पास बना है। यहाँ पर वन विभाग द्वारा पर्यावरण चेतना केंद्र स्थापित किया गया है, जो भालुओं के संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाने का काम करता है। यहाँ आते-जाते भालू के दर्शन भी हो जाते हैं। यहाँ पर स्थित सेल्फ़ी पॉइंट स्थानीय लोगों के बीच बहुत प्रसिद्ध है। यहाँ पर स्कूल-कॉलेज के बच्चों के लिए दिन भर के लिए नवाचार कैम्प भी विशेष मांग पर आयोजित किए जाते हैं। गगनई नेचर कैम्प में बारोमाह सैलानियों का तांता लगा रहता है।

]]>
https://chhattisgarhstate.com/gagnai-reservoir-tourism-tourists-can-enjoy-boating-in-gagnai-reservoir-located-in-the-lap-of-nature/feed/ 0
घर में इन पेड़-पौधों को लगा लो ये अत्यंत सुभ होते है https://chhattisgarhstate.com/plant-these-trees-and-plants-in-your-home-they-are-very-auspicious/ https://chhattisgarhstate.com/plant-these-trees-and-plants-in-your-home-they-are-very-auspicious/#respond Mon, 17 Jun 2024 12:52:51 +0000 https://chhattisgarhstate.com/?p=2518 हर व्यक्ति चाहता है कि उसके घर के बगीचे में तरह-तरह के पेड़-पौधे लगे हों। लेकिन यह जानना भी बहुत जरूरी है कि घर के लिए शुभ वृक्ष कौन से होते हैं। कई पेड़-पौधों का घर के आसपास होना अशुभ माना जाता है, जबकि कई ऐसे होते हैं जो दोष निवारक माने जाते हैं। तो चलिए जानते हैं इन वृक्षों के बारे में।

  1. तुलसी का पौधा: हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को लक्ष्मी का रूप माना गया है। कहा जाता है कि जिस घर में तुलसी की पूजा होती है, वहां भगवान श्री विष्णु की कृपा सदैव बनी रहती है। यह पौधा नेगेटिव एनर्जी को नष्ट करने की शक्ति रखता है। ध्यान रखें कि तुलसी का पौधा घर के दक्षिण भाग में नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि इससे नुकसान हो सकता है। इसे घर के उत्तर या पूर्व दिशा में लगाना चाहिए।
  2. बेलपत्र का पौधा: भगवान शिव को बेल का वृक्ष अत्यंत प्रिय है और इस वृक्ष पर भगवान शिव का निवास माना जाता है। घर में बेल का वृक्ष लगाने से धन संपदा की देवी लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और सभी संकट दूर हो जाते हैं। बेल के वृक्ष का सुबह-शाम दर्शन करना चाहिए।
  3. शमी का पौधा: शमी का पौधा घर में होना बहुत ही शुभ माना जाता है। ज्योतिष में इसका संबंध शनि से माना जाता है। इस पौधे को घर के मुख्य द्वार के बाहर लगाना शुभ होता है। शनि के प्रकोप को कम करने के लिए इसके नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। विजयदशमी के दिन शमी की विशेष पूजा करने से धन-धान्य की कमी नहीं होती।
  4. अश्वगंधा का पौधा: अश्वगंधा का पौधा घर में लगाने से समस्त वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं और जीवन को सक्रिय बनाता है। इसे घर में किसी भी दिशा में लगा सकते हैं, सिवाय दक्षिण दिशा के।
  5. आंवला का पौधा: आंवला का पौधा उत्तर या पूर्व दिशा में लगाने से अत्यंत लाभदायक होता है। इसकी पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आंवला का वृक्ष भगवान विष्णु को भी प्रिय है और कार्तिक मास में तो स्वयं भगवान विष्णु इस वृक्ष की जड़ में निवास करते हैं।
  6. अशोक का वृक्ष: अशोक के वृक्ष को हिंदू धर्म में बहुत ही शुभ और लाभकारी माना गया है। इसे घर में लगाने से शोक का नाश होता है और प्रसन्नता आती है। इसकी जड़ को शुभ मुहूर्त में धारण करने से मनुष्य को सभी पापों से मुक्ति मिलती है।
  7. दूध वाले पौधे: वास्तु के अनुसार दूध वाले पौधों का घर की सीमा में होना अशुभ माना जाता है, लेकिन दूधिया श्वेता और अनार इसके अपवाद हैं। ये दोनों पौधे सुख और समृद्धि के कारक माने जाते हैं।
  8. गुड़हल का पौधा: गुड़हल का पौधा ज्योतिष में सूर्य और मंगल से संबंध रखता है। इसे घर में लगाना शुभ माना जाता है, लेकिन ध्यान रखें कि इसे पर्याप्त धूप मिले।
  9. नारियल का पेड़: नारियल का पेड़ घर में बहुत ही शुभ माना जाता है। इसे हर पूजा में चढ़ाया जाता है और शुभ कार्यों से पहले देवताओं को भेंट किया जाता है।
  10. नीम का पेड़: नीम का पेड़ घर के कोने में होना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह पॉजिटिव एनर्जी लाता है और कल्याणकारी होता है।
  11. केले का पौधा: केले का पौधा धार्मिक कार्यों में महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे उत्तर या पूर्व दिशा में लगाना चाहिए।
  12. बांस का पौधा: बांस का पौधा घर में लगाना शुभ माना जाता है। यह समृद्धि और सफलता लाता है।
  13. मनी प्लांट: मनी प्लांट का पौधा समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसे घर के दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाना सबसे शुभ माना गया है।

इन सभी पौधों को सही दिशा में लगाकर आप अपने जीवन में सुख, समृद्धि और शांति ला सकते हैं। आशा है कि यह जानकारी आपको पसंद आई होगी। अपने जीवन में इन बातों को अपनाएं और देखें कि कैसे ये पौधे आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं।

]]>
https://chhattisgarhstate.com/plant-these-trees-and-plants-in-your-home-they-are-very-auspicious/feed/ 0
Chaiturgarh Mandir Chhattisgarh | चैतुरगढ़ छत्तीसगढ़ | Chaiturgarh Korba | https://chhattisgarhstate.com/chaiturgarh-mandir-chhattisgarh-chaiturgarh-chhattisgarh-chaiturgarh-korba/ https://chhattisgarhstate.com/chaiturgarh-mandir-chhattisgarh-chaiturgarh-chhattisgarh-chaiturgarh-korba/#respond Mon, 17 Jun 2024 12:47:32 +0000 https://chhattisgarhstate.com/?p=2515 छत्तीसगढ़ का चैतुरगढ़ किला अपनी वास्तुकला, इतिहास और खूबसूरती के लिए पर्यटकों के बीच विख्यात है। चैतुरगढ़ किले को लक्खा गढ़ किले के नाम से भी जाना जाता है। यह किला छत्तीसगढ़ के 36 किलों में से एक है और 5 किमी वर्ग के क्षेत्रफल में फैला हुआ है।

चैतुरगढ़ किला भारत के सबसे मजबूत प्राकृतिक किलों में से एक है और यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित है। यह किला 3,060 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और कोरबा जिले से 70 किमी की दूरी पर है। किले में महिषासुर मर्दिनी मंदिर भी स्थित है, साथ ही यह जगह विभिन्न जड़ी-बूटियों और वन्य जीव-जन्तुओं से भरी हुई है।

बरसात के समय किले की यात्रा करना खास मजेदार और रोमांचक होता है। चैतुरगढ़ किला राजा पृथ्वी देव द्वारा बनवाया गया था और इसका निर्माण कलचुरी संवत 1069 ईस्वी में हुआ था। किले में प्रवेश के लिए तीन द्वार हैं – मेनका, हुंकार और सिंह द्वार।

किले की ज्यादातर दीवारें प्राकृतिक रूप से निर्मित हैं, जबकि कुछ ही दीवारें बनाई गई हैं। किले में पांच तालाब हैं, जिनमें से तीन तालाब हमेशा पानी से भरे रहते हैं। ये तालाब गर्गज, सुखी और केकड़ा तालाब हैं।

चैतुरगढ़ पहाड़ों से तीनधारी और श्रृंगी झरने बहते हैं और जटाशंकरी नदी का उद्गम भी यहीं से होता है। किले की दीवारें विभिन्न आकार-प्रकार की हैं और प्रवेश द्वार वास्तुकला की दृष्टि से विशेष रूप से सुंदर हैं। इसमें कई स्तंभ और मूर्तियाँ भी हैं, साथ ही एक विशाल गुंबद है जो मजबूत स्तंभों पर टिका हुआ है।

महिषासुर मर्दिनी मंदिर समुद्र तल से लगभग 3,060 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और गर्मियों में भी यहां का तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस रहता है। इस वजह से इसे “छत्तीसगढ़ का कश्मीर” भी कहा जाता है।

महिषासुर मर्दिनी माता मंदिर को नगर शैली में बनाया गया है, जिसमें विशिष्ट योजना और विमान के साथ त्रिकोणीय आकार होता है। मंदिर के गर्भगृह में माता की 12 हाथों वाली मूर्ति है और आसपास हनुमान, काल भैरव और शनिदेव की मूर्तियाँ भी हैं।

चैत्र और कुमार के नवरात्रि में यहाँ भव्य मेले का आयोजन होता है जिसमें हजारों लोग शामिल होते हैं।

चैतुरगढ़ किले तक पहुंचने के लिए हवाई यात्रा से आप स्वामी विवेकानंद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहुंच सकते हैं। रायपुर से किले की दूरी 200 किलोमीटर है। ट्रेन द्वारा चैतुरगढ़ कोरबा रेलवे स्टेशन से लगभग 50 किलोमीटर और बिलासपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बस द्वारा चैतुरगढ़ कोरबा बस स्टैंड से 50 किलोमीटर और बिलासपुर बस स्टैंड से 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

यहां की प्राकृतिक खूबसूरती, पहाड़ों के बीच बसा किला, झरने और उनके रहस्य रोमांस, इतिहास, वास्तुकला और रहस्य में रुचि रखने वाले लोगों के लिए बहुत कुछ प्रदान करते हैं।

]]>
https://chhattisgarhstate.com/chaiturgarh-mandir-chhattisgarh-chaiturgarh-chhattisgarh-chaiturgarh-korba/feed/ 0
खुद की वैल्यू बढ़ाने के 15 तरीके || Chanakya Niti || https://chhattisgarhstate.com/15-ways-to-increase-your-self-worth-chanakya-niti/ https://chhattisgarhstate.com/15-ways-to-increase-your-self-worth-chanakya-niti/#respond Sun, 16 Jun 2024 09:12:19 +0000 https://chhattisgarhstate.com/?p=2501 अगर आप समाज में अपनी अलग पहचान बनाना चाहते हैं, नाम कमाना चाहते हैं, या फिर समाज पर अपना प्रभाव डालना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपके पास एक वैल्यू होना जरूरी है। अगर आपका समाज में कोई वैल्यू नहीं होगा, तो लोग आपको जरा भी महत्व नहीं देंगे। जिन लोगों की कोई वैल्यू नहीं होती, उन्हें लोग किसी भी काम के लिए नहीं पूछते। अगर आप अपनी वैल्यू बढ़ाना चाहते हैं, तो इस वीडियो को अंत तक देखें। इसमें हम आपको 15 तरीके बताएंगे जिससे आप अपनी वैल्यू बढ़ा सकते हैं। तो चलिए शुरू करते हैं:

  1. खुद की कदर करना सीखें: अपनी वैल्यू बढ़ाने के लिए सबसे पहले खुद की कदर करना जरूरी है। जब तक आप खुद अपनी महत्वता नहीं समझेंगे, तब तक दूसरों से कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि वे आपकी महत्वता समझेंगे?
  2. कम बोलें: जो लोग कम बोलते हैं और जरूरत पर ही बोलते हैं, वे सफलता तक जल्दी पहुंचते हैं। कम बोलने से लोग आपकी बात ध्यान से सुनते हैं और आपके प्रति सम्मान बढ़ता है।
  3. किसी की बुराई मत करें: दूसरों की बुराई करने से आपकी वैल्यू कम हो जाती है। इससे आपकी थिंकिंग का पता चलता है और लोग आपको सम्मान देना बंद कर देते हैं।
  4. ना बोलना सीखें: हमेशा हां में हां मिलाने से लोग आपका फायदा उठाते हैं। जरूरत पड़ने पर ना बोलना सीखें, इससे आपकी इमेज बरकरार रहेगी।
  5. जल्दी रिप्लाई मत करें: तुरंत जवाब देने की बजाय, सोच-समझकर जवाब दें। इससे आपकी वैल्यू बढ़ेगी क्योंकि लोग आपकी सलाह को महत्वपूर्ण मानेंगे।
  6. अपने काम पर फोकस करें: अपने काम पर ध्यान देने से आप सफल होंगे और लोग आपको आदर्श मानने लगेंगे।
  7. साफ कपड़े पहनें: साफ और अच्छे कपड़े पहनने से लोग आपकी तरफ आकर्षित होंगे और आपकी वैल्यू बढ़ेगी।
  8. फैसला सोच-समझकर लें: जल्दबाजी में फैसला लेने से बचें। सही फैसले लेने से लोग आपका सम्मान करेंगे और आपकी छवि अच्छी होगी।
  9. बहस कम करें: बहस करने से आपकी इमेज पर बुरा असर पड़ता है और लोग आपको कम सम्मान देने लगते हैं।
  10. ज्ञान बढ़ाएं: अपने ज्ञान को बढ़ाएं ताकि आप लोगों के सवालों का सही जवाब दे सकें। इससे आपकी वैल्यू बढ़ेगी।
  11. सुनने की आदत डालें: दूसरों की बात ध्यान से सुनें। इससे आप बेहतर संवाद स्थापित कर पाएंगे और लोग आपको पसंद करेंगे।
  12. अपनी तारीफ खुद ना करें: अपनी तारीफ खुद करने से बचें। तारीफ हमेशा दूसरों से करना अच्छा रहता है।
  13. ज्यादा अवेलेबल ना रहें: हमेशा किसी के लिए उपलब्ध रहने से लोग आपका इस्तेमाल करने लगते हैं और आपकी वैल्यू कम हो जाती है।
  14. अपने वचन को पूरा करें: अगर आप किसी से वादा करते हैं, तो उसे पूरा करें। इससे लोग आपको भरोसेमंद मानेंगे और आपकी वैल्यू बढ़ेगी।
  15. अमीर बनें: पैसे कमाएं और अमीर बनें। जब आपके पास पैसा होगा, तो लोग आपको सम्मान देंगे और आपकी वैल्यू बढ़ेगी।
]]>
https://chhattisgarhstate.com/15-ways-to-increase-your-self-worth-chanakya-niti/feed/ 0
घर में पैसा नहीं टिकता तो आज ही 10 चीज घर से हटा दो अमीर बनने से कोई नहीं रोकेगा https://chhattisgarhstate.com/if-money-does-not-last-in-the-house-remove-10-things-from-the-house-today/ https://chhattisgarhstate.com/if-money-does-not-last-in-the-house-remove-10-things-from-the-house-today/#respond Sun, 16 Jun 2024 09:08:32 +0000 https://chhattisgarhstate.com/?p=2498 घर में पैसा नहीं टिकता? तो आज ही इन 10 चीजों को हटा दें, अमीर बनने से कोई नहीं रोकेगा!

वास्तुशास्त्र में दिशा और चीजों की सही जगह पर होने का बड़ा महत्व होता है। अगर आप बहुत पैसा कमाते हैं, लेकिन फिर भी धन की कमी है, तो आप शायद कोई गलती कर रहे हैं। अगर आपके अच्छे दिन बुरे दिनों में बदलने लगें, तो सावधान हो जाएं। कई बार लोग कहते हैं कि घर में धन नहीं टिकता और बिना मतलब के खर्चे होते रहते हैं। वहीं, घर में हमेशा तनाव भरा माहौल रहता है। लोग अक्सर अपनी किस्मत को दोष देते हैं, लेकिन वास्तु के अनुसार घर में मौजूद कुछ चीजें भी धन हानि और परेशानियों का कारण बन सकती हैं। अगर आपके साथ ऐसा हो रहा है, तो अपने घर में रखी चीजों पर ध्यान दें। हर चीज से सकारात्मक या नकारात्मक ऊर्जा निकलती है, और इसका असर घर के सदस्यों पर पड़ता है। नकारात्मक ऊर्जा वाली कोई भी चीज घर में हो, तो व्यक्ति को मानसिक, आर्थिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

वास्तुशास्त्र के अनुसार, सुख, समृद्धि और सकारात्मकता के लिए कई नियम बताए गए हैं। कई लोग वास्तु में विश्वास करते हैं और अपने घर का सारा सामान वास्तु के अनुसार रखते हैं। यह जरूरी है कि आप भी इन नियमों का पालन करें। एक छोटी सी वस्तु भी आपके भाग्य को रोक सकती है या विपत्ति का कारण बन सकती है। याद रखें, निर्जीव वस्तुओं में भी अपनी ऊर्जा होती है। इसलिए घर में मौजूद चीजों से जुड़ी नकारात्मक ऊर्जा को पहचानना और उन्हें हटा देना जरूरी है।

तो आइए जानते हैं, वे 10 चीजें जो घर में नहीं होनी चाहिए:

1. देवी-देवताओं की फटी हुई तस्वीरें या खंडित मूर्तियाँ

पुरानी और फटी हुई देवी-देवताओं की तस्वीरें या खंडित मूर्तियाँ आर्थिक हानि का कारण बनती हैं। इन्हें किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए। घर में देवी-देवताओं के चित्रों की संख्या और स्थान निश्चित होना चाहिए।

2. हिंसात्मक जानवरों और पक्षियों की तस्वीरें

सांप, गधे, उल्लू, सूअर, चमगादड़, गिद्ध, कबूतर, कौआ आदि की तस्वीरें घर में न लगाएं। ये तस्वीरें आपके परिवेश में हिंसात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देती हैं।

3. फटा हुआ पर्स या तिजोरी

फटा हुआ पर्स या तिजोरी कभी भी न रखें। यह आर्थिक समस्याओं का कारण बनता है। पर्स में हमेशा धार्मिक और पवित्र वस्तुएं रखें।

4. टूटी-फूटी चीजें

टूटे-फूटे बर्तन, दर्पण, इलेक्ट्रॉनिक सामान, तस्वीरें, दीपक, पलंग, घड़ी, झाड़ू, मग, फर्नीचर आदि घर में न रखें। यह नकारात्मक ऊर्जा का निर्माण करती हैं।

5. खाली पूजा कलश

पूजा घर में रखे कलश को कभी खाली न रखें। इसमें हमेशा गंगाजल भरकर रखें, इससे घर में सुख और समृद्धि आती है।

6. नकली या कांटेदार पौधे

घर में नकली या कांटेदार पौधे न लगाएं। यह पारिवारिक संबंधों में कड़वाहट पैदा करते हैं।

7. हानिकारक वस्तुएं

दवाइयां, टॉयलेट क्लीनर, जहरीले रसायन, कीटनाशक आदि को सुरक्षित स्थान पर रखें। इनसे नकारात्मक ऊर्जा फैलती है।

8. मकड़ी के जाले

घर में मकड़ी के जाले तुरंत हटा दें। यह आपके अच्छे दिनों को बुरे दिनों में बदल सकते हैं।

9. अनावश्यक पत्थर और नग

घर में अनावश्यक पत्थर, नग, अंगूठी, ताबीज आदि न रखें। यह दुर्भाग्य का कारण बन सकते हैं।

10. टूटी हुई सोफा, कुर्सी या टेबल

टूटी हुई चेयर, टेबल या सोफा घर में न रखें। यह आपकी तरक्की और पैसों को रोक देती है।

इन चीजों को घर से हटाकर आप नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकते हैं और अपने घर में सुख-शांति और समृद्धि ला सकते हैं।

]]>
https://chhattisgarhstate.com/if-money-does-not-last-in-the-house-remove-10-things-from-the-house-today/feed/ 0
कर्म के हिसाब से अगला जन्म कैसा होगा? https://chhattisgarhstate.com/how-will-be-the-next-birth-according-to-karma/ https://chhattisgarhstate.com/how-will-be-the-next-birth-according-to-karma/#respond Sun, 16 Jun 2024 09:00:06 +0000 https://chhattisgarhstate.com/?p=2495 गरुड़ पुराण के अनुसार, हर जीव का पुनर्जन्म होता है, अर्थात् वह फिर से जन्म लेता है। नमस्कार मित्रों, यदि आप श्री कृष्ण के भक्त हैं तो कमेंट बॉक्स में ‘जय श्री कृष्णा’ लिखिए। गरुड़ पुराण के मुताबिक, मृत्यु के बाद मनुष्य को कौन सा जन्म मिलेगा, यह उसके पूर्व जन्म के कर्मों पर निर्भर करता है। अधिकांश लोगों में अगले और पिछले जन्म के बारे में जानने की उत्सुकता होती है। लोगों के मन में जिज्ञासा होती है कि वे मनुष्य बनेंगे या पशु, या फिर कीड़े-मकोड़े। यदि इंसान बनेंगे, तो कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि वे महिला के रूप में जन्म लेंगे या पुरुष के रूप में।

हिंदू धर्म में उल्लेख मिलता है कि जो इंसान जन्म लेता है उसकी मृत्यु अवश्य होती है। परंतु क्या आप जानते हैं कि मनुष्य मरने के बाद कौन सी योनि में जन्म लेता है? गरुड़ पुराण हिंदू धर्म के महापुराणों में से एक है। इसमें जन्म, मृत्यु और मृत्यु के बाद की घटनाओं का विस्तारपूर्वक वर्णन मिलता है। इस पुराण में ऐसी कई बातें बताई गई हैं जिन्हें अपनाने से व्यक्ति अपने जीवन की स्थिति सुधार सकता है। गरुड़ पुराण बहुत महत्त्वपूर्ण है, जो कि सनातन धर्म में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद पढ़ा जाता है। गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु और गरुड़ पक्षी के बीच बातचीत को बताया गया है, साथ ही इसमें व्यक्ति के चरित्र के बारे में भी बताया गया है।

ईश्वर की दृष्टि में अच्छे कर्म यानी पुण्य और बुरे कर्म यानी पाप होते हैं। गरुड़ पुराण और कठोपनिषद में उल्लेख मिलता है कि मनुष्य धरती पर जो कुछ भी पाप करता है, उन सभी पापों की सजा बारी-बारी से मिलती है। गरुड़ पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति अच्छे कर्म करता है उसे स्वर्ग में स्थान मिलता है, वहीं बुरे कर्मों के लिए नर्क का सामना करना पड़ता है। आज हम आपको इसी के बारे में बताने जा रहे हैं।

मनुष्य के अगले जन्म को लेकर विभिन्न योनियों का वर्णन:

  1. कछुआ की योनि: माता-पिता को कष्ट पहुंचाने वाली संतान या भाई-बहन को प्रताड़ित करने वाले मनुष्य कछुआ की योनि में जन्म लेते हैं। कछुए का जीवनकाल बहुत लंबा होता है, लगभग 200 से 300 वर्षों का।
  2. स्त्री का जन्म: यदि कोई पुरुष महिलाओं जैसा आचरण करता है तो अगले जन्म में स्त्री का रूप मिलता है।
  3. बंदर की योनि: अपने मालिक का विश्वास तोड़ने वाला व्यक्ति बंदर की योनि में जन्म लेता है।
  4. गधे की योनि: अपने सच्चे मित्र का अपमान करने वाला व्यक्ति गधे की योनि भोगता है।
  5. कुत्ते की योनि: धर्म का अपमान करने वाले, पूजा-पाठ न करने वाले व्यक्ति कुत्ते की योनि में जन्म लेते हैं।
  6. कीड़े-मकोड़े की योनि: दूसरों की निंदा करने वाला व्यक्ति कीड़े-मकोड़े के रूप में जन्म लेता है।
  7. छछुंदर की योनि: सुगंधित पदार्थ की चोरी करने वाला व्यक्ति छछुंदर के रूप में जन्म लेता है।
  8. उल्लू की योनि: चालाकी से दूसरों को मूर्ख बनाकर ठगने वाले लोग उल्लू की योनि में जन्म लेते हैं।
  9. भेड़िया, कुत्ता, सियार, गिद्ध, कौवा, और बगुला: पराई स्त्री से संबंध बनाने वाला व्यक्ति इन योनियों में जन्म लेता है।
  10. बकरे की योनि: गाली-गलौज करने वाला व्यक्ति बकरे की योनि में जन्म लेता है।
  11. मूर्ख और कूबड़: स्त्री की हत्या, गर्भपात या गाय की हत्या करने वाला व्यक्ति मूर्ख और कूबड़ के रूप में जन्म लेता है।
  12. कौआ: अपने बड़े भाई का अपमान करने वाला व्यक्ति कौआ के रूप में जन्म लेता है।

धर्म ग्रंथों के अनुसार, जीवन-मरण और अगला जन्म सब कुछ कर्मों के आधार पर ही तय होता है। अच्छे कर्म करने से आत्मा मुक्ति के मार्ग की ओर अग्रसर हो सकती है, जबकि बुरे कर्म करके स्थिति को भविष्य में बदतर बना सकती है। मनुष्य जन्म कितना दुर्लभ है, यह समझने के लिए हमें अपने कर्मों को सुधारना चाहिए और ईश्वर की भक्ति करनी चाहिए।

]]>
https://chhattisgarhstate.com/how-will-be-the-next-birth-according-to-karma/feed/ 0
क्या हमारा भाग्य पहले से ही लिखा होता है या यह हमारे कर्मों से निर्धारित होता है? https://chhattisgarhstate.com/is-our-destiny-already-written-or-is-it-determined-by-our-actions/ https://chhattisgarhstate.com/is-our-destiny-already-written-or-is-it-determined-by-our-actions/#respond Sun, 16 Jun 2024 08:54:24 +0000 https://chhattisgarhstate.com/?p=2492 क्या हमारा भाग्य पहले से ही लिखा होता है या यह हमारे कर्मों से निर्धारित होता है? यह एक महत्वपूर्ण और पुरानी चर्चा है। कई लोग मानते हैं कि हमारा भाग्य जन्म से पहले ही तय हो जाता है, जबकि अन्य मानते हैं कि हमारे कर्म ही हमारे भाग्य का निर्माण करते हैं। भाग्य और कर्म को समझना आवश्यक है, क्योंकि इससे यह पता चलेगा कि क्या हमारे पूर्व निर्धारित भाग्य के कारण हम पाप कर्म करते हैं, या हमारे कर्म ही हमारे भाग्य को बनाते और बिगाड़ते हैं।

इस वीडियो में आप जानेंगे कि भाग्य और कर्म में अधिक शक्तिशाली कौन है और क्यों। साथ ही, इस विषय पर गरुड़ पुराण, हिंदू धर्म ग्रंथों, आचार्य चाणक्य की चाणक्य नीति, और विभिन्न धर्मों जैसे इस्लाम और ईसाई धर्म में क्या लिखा है, वह भी जानेंगे।

नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका हमारे चैनल संतोष जोशी ज्ञान में। आपसे अनुरोध है कि इस वीडियो को अंत तक देखें, चैनल को सब्सक्राइब करें, और कमेंट बॉक्स में जय श्री नारायण लिखकर परमात्मा को अपना आभार व्यक्त करें।

सबसे पहले, गरुड़ पुराण में भाग्य के बारे में क्या कहा गया है, वह जानें। गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद केवल शरीर नष्ट होता है, आत्मा नहीं। कुल 84 लाख योनियों में मनुष्य योनि सबसे श्रेष्ठ मानी गई है। मनुष्य को उसके कर्मों के आधार पर अगली योनि मिलती है। गरुड़ पुराण कहता है कि जो व्यक्ति धर्म, वेद, पुराण का अपमान करता है, उसका अगला जन्म कुत्ते की योनि में होता है। जो धोखा देते हैं, उनका जन्म गिद्ध के रूप में होता है। इससे स्पष्ट होता है कि हमारे कर्म ही हमारे अगले जन्म का निर्धारण करते हैं।

आचार्य चाणक्य के अनुसार, व्यक्ति अपने कर्मों से अपनी मृत्यु को भी प्रभावित कर सकता है। चाणक्य नीति में कहा गया है कि किसी भी मनुष्य के भाग्य की पांच चीजें – आयु, कर्म, धन, विद्या, और मृत्यु का समय – मां के गर्भ में ही तय हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने कर्मों के हिसाब से सुख-दुख भोगना पड़ता है, चाहे वह वर्तमान के हों या पिछले जन्म के।

भगवान श्री कृष्ण ने भगवद गीता में बताया है कि मनुष्य अपने भाग्य का निर्माण खुद करता है। जीवन के हर कदम पर हमारी सोच, व्यवहार और कर्म ही हमारा भाग्य निर्धारण करते हैं। गीता में कंस की कथा बताई गई है, जहां कंस अपने भाग्य से बचने की कोशिश करता है, लेकिन अंततः उसके कर्म ही उसके विनाश का कारण बनते हैं।

सनातन धर्मशास्त्रों और पुराणों के अनुसार, हर प्राणी का भाग्य जन्म से पहले ही निश्चित होता है। लेकिन यह भी कहा गया है कि भाग्य को कर्म से बदला जा सकता है। हिंदू धर्म में भाग्य को प्रारब्ध कहा जाता है, जिसका मतलब है कि हमारा वर्तमान जीवन हमारे पिछले कर्मों का फल है। हमें अपने कर्मों को सुधारने का प्रयास करना चाहिए और भाग्य को स्वीकार करना चाहिए।

पुराणों में एक कहानी आती है जिसमें देवर्षि नारद जी ने भगवान विष्णु से पूछा कि पाप करने वालों को अच्छा फल क्यों मिल रहा है। भगवान विष्णु ने बताया कि कर्म के अनुसार ही सबकुछ हो रहा है। चोर को सोने की मोहरे मिलीं, लेकिन खजाना नहीं, क्योंकि उसने पाप किया था। वहीं साधु को गड्ढे में इसलिए गिरना पड़ा क्योंकि उसके भाग्य में मृत्यु थी, लेकिन उसके पुण्य के कारण वह बच गया। इससे स्पष्ट होता है कि कर्म से ही भाग्य तय होता है।

इस प्रकार, पुराणों के अनुसार कर्म को भाग्य से श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि भाग्य पर हमारा नियंत्रण नहीं होता, लेकिन कर्म पर होता है। कर्म से हम अपना भाग्य सुधार सकते हैं, जबकि भाग्य से कर्म नहीं सुधरते। कर्म करते रहना महत्वपूर्ण है, क्योंकि सफलता हमारे कर्मों का ही परिणाम होती है।

]]>
https://chhattisgarhstate.com/is-our-destiny-already-written-or-is-it-determined-by-our-actions/feed/ 0
Surguja @आखिर क्यूँ लोग हजारो किलोमीटर का सफ़र तय करके पहुचते है सरगुजा के रामगढ में जाने कारण https://chhattisgarhstate.com/surguja-after-all-why-do-people-travel-thousands-of-kilometers-to-reach-ramgarh-in-surguja/ https://chhattisgarhstate.com/surguja-after-all-why-do-people-travel-thousands-of-kilometers-to-reach-ramgarh-in-surguja/#respond Thu, 06 Jun 2024 20:38:06 +0000 https://chhattisgarhstate.com/?p=2424 Surguja District:- सीताबेंगरा, छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 300 किलोमीटर दूर रामगढ़ में स्थित है। अंबिकापुर-बिलासपुर मार्ग पर स्थित रामगढ़ के जंगलों में तीन कमरों वाली यह गुफा देश की सबसे पुरानी नाट्यशाला मानी जाती है। सीताबेंगरा गुफा पत्थरों में काटकर बनाई गई है और यह प्रसिद्ध जोगीमारा गुफ़ा के पास ही स्थित है। इस गुफा का महत्व इसके नाट्यशाला होने के कारण है। माना जाता है कि यह गुफा ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी की है। जोगीमारा गुफ़ा की दीवार पर सम्राट अशोक के काल का लेख है, जिससे इसकी प्राचीनता सिद्ध होती है।

सीताबेंगरा गुफा की संरचना नाट्यशाला के रूप में की गई है, जिसमें कलाकारों के लिए मंच नीचे और दर्शक दीर्घा ऊँचाई पर स्थित है। यह प्रांगण 48 फीट लंबा और 15 फीट चौड़ा है।यहाँ आने पर आप गुफा के भीतर की वास्तुकला और संरचना को देख सकते हैं। लोक मान्यताओं के अनुसार, यह स्थान माता सीता के हरण से संबंधित है। गुफा के भीतर लक्ष्मणरेखा भी देखी जा सकती है। स्थानीय पुजारियों से बात कर आप इस स्थान के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को समझ सकते हैं।

सीताबेंगरा गुफा के पास ही जोगीमारा गुफ़ा है, जिसे लक्ष्मण बेंगरा भी कहा जाता है। इस स्थान पर माता सीता, भगवान राम और लक्ष्मण के निवास के प्रमाण माने जाते हैं। लक्ष्मण झूला, सीता रसोई और अन्य महत्वपूर्ण स्थान भी यहाँ स्थित हैं।अगर आपको सीताबेंगरा और इसके आस-पास की अन्य गुफाओं के बारे में और जानना है, तो यहाँ आकर देख सकते हैं। यह स्थान ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है और यहां का दौरा एक अद्भुत अनुभव हो सकता है।

]]>
https://chhattisgarhstate.com/surguja-after-all-why-do-people-travel-thousands-of-kilometers-to-reach-ramgarh-in-surguja/feed/ 0