# Doctor Verified – अतुल्य छत्तीसगढ़: संस्कृति, सौंदर्य और समृद्धि का संगम https://chhattisgarhstate.com अतुल्य छत्तीसगढ़: संस्कृति, सौंदर्य और समृद्धि का संगम Mon, 16 Sep 2024 17:16:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.1 https://chhattisgarhstate.com/wp-content/uploads/2024/02/chhattsgarh-state-2-75x75.png # Doctor Verified – अतुल्य छत्तीसगढ़: संस्कृति, सौंदर्य और समृद्धि का संगम https://chhattisgarhstate.com 32 32 हार्ट अटैक का कारण बन सकता है कोरोनरी धमनी रोग (CAD), जानें कैसे किया जाता है इसका इलाज? https://chhattisgarhstate.com/coronary-artery-disease-can-cause-heart-attack-know-how-it-is-treated/ https://chhattisgarhstate.com/coronary-artery-disease-can-cause-heart-attack-know-how-it-is-treated/#respond Mon, 16 Sep 2024 17:15:57 +0000 https://chhattisgarhstate.com/?p=2946 कोरोनरी आर्टरी डिजीज हृदय से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है। लेकिन, समय पर पहचान कर इसका इलाज किया जाता है। आगे जानते हैं इसके इलाज के बारे में

शरीर के अन्य अंगों की तरह हृदय का अहम रोल होता है। यह हमारे शरीर के सभी अंगों तक रक्त को पहुंचाने के लिए पंप करने का काम करता है। पूरे शरीर का रक्त हृदय के अंदर पहुंचता है और यहां से पंप होकर दोबारा अंगों तक भेजा जाता है। हृदय को रक्त पहुंचाने वाली नसों को कोरोनरी आर्टरी कहा जाता है। जब इन नसों का मार्ग में प्लाक (cholesterol, वसा, कैल्शियम और अन्य तत्व) जमा हो जाते हैं, तो ऐसे में हृदय तक रक्त पहुंचने की प्रक्रिया में बाधा आती है। इस दौरान व्यक्ति को हृदय में तेज दर्द, सांस लेने में परेशानी और हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है। इस स्थिति को कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary Artery Disease) कहा जाता है। यदि, समय पर इसका इलाज न किया जाए या इसे अनदेखा किया जाए तो इससे नसे ब्लॉक हो सकती हैं, जो हार्ट अटैक की वजह बन सकता है। इस लेख में जानेंगे कि कोरोनरी हार्ट डिजीज का इलाज कैसे (How To Teat Coronary Artery Disease) किया जाता है?

कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) का इलाज कैसे किया जाता है? – Treatment Of Coronary Artery Disease In Hindi 

कोरोनरी आर्टरी डिजीज की पहचान करने के लिए डॉक्टर इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG), एंजियोग्राफी, ब्लड टेस्ट, और इकोकार्डियोग्राम करने की सलाह देते हैं। टेस्ट से पुष्टि होने के बाद व्यक्ति की आयु, शारीरिक स्थिति और अन्य कारक के आधार पर इलाज को चुनते हैं। आगे जानते हैं इसके इलाज के बारे में। 

व्यक्ति की लाइफस्टाइल में बदलाव 

कोरोनरी आर्टरी डिजीज होने पर डॉक्टर सबसे पहले व्यक्ति की लाइफस्टाइल में बदलाव करने की सलाह दी जाती है। इसमें डाइट में फैट युक्त और कोलेस्ट्रोल युक्त चीजों को डाइट से बाहर किया जाता है। इसके अलावा, फल, सब्जियों, साबुत अनाज को डाइट में शामिल किया जाता है। व्यक्ति को रोजाना हल्के व्यायाम करने की सलाह दी जाती है। साथ ही, इलाज से पहले व्यक्ति को शराब, धूम्रपान और सिगरेट आदि को छोड़ना होता है।

मेडिसिन से इलाज 

लाइफस्टाइल में बदलाव के साथ ही डॉक्टर मरीज को हार्ट में ब्लड की आपूर्ति करने और प्लाक को कंट्रोल करने वाली दवाएं देते हैं। इसमें रक्त में प्लेटलेट्स को जमने से रोकने के लिए एंटिप्लेटलेट्स (antiplatelets), बैड कोलेस्ट्रोल को कम करने के लिए स्टेटिन्स, हृदय की धड़कनों को कम करके हार्ट पर पड़ने वाले प्रेशर को कम करने के लिए बीटा-ब्लॉकर्स (beta-blockers) और धमनियों को चौड़ा करने और ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने के लिए नाइट्रेट्स आदि दवाएं दी जा सकती हैं। 

सर्जरी 

हृदय से जुड़ी गंभीर समस्याओं में डॉक्टर सर्जरी का विकल्प चुन सकते हैं। इसमें तीन तरह क प्रक्रिया को अपनाया जा सकता है।

  • एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग (Angioplasty and stent): इसमें खराब धमनियों को खोलने और ब्लड सर्कुलेशन को दोबार सही करने के लिए एक छोटी ट्यूब (स्टेंट) का उपयोग किया जाता है।
  • बाईपास सर्जरी (Coronary Artery Bypass Graft – CABG): इस सर्जरी में धमनियों (नसों) का अवरोधित हिस्से को बाईपास कर एक नई नस लगाई जाती है।
  • रोटा-अब्लेशन (Rotablation): इसमें धमनियों (नसों) में जमा हुए कठोर प्लाक को निकालने के लिए एक विशेष यंत्र का उपयोग किया जाता है।

Coronart Artery Disease Treatment: कोरोनरी आर्टरी डिजीज हार्ट से जुड़ी समस्या है। इसमें व्यक्ति को अत्यधिक थकान, कमजोरी, सांस फूलना, दिल की धड़कने अनियमित होना, हाथ पैरों में झुनझुनी और हार्ट पेन जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे में आप तुरंत किसी हार्ट स्पेशलिस्ट से मिलकर समस्या के कारण की पहचान करें। 

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सभी न्यू पेरेंट्स को शिशु के बारे में पता होनी चाहिए ये 10 चीजें https://chhattisgarhstate.com/all-new-parents-should-know-these-10-things-about-their-baby/ https://chhattisgarhstate.com/all-new-parents-should-know-these-10-things-about-their-baby/#respond Wed, 28 Aug 2024 10:58:13 +0000 https://chhattisgarhstate.com/?p=2866 शिशु के दूध पीने से लेकर रात को सोने तक सभी नए माता-पिता को अपने शिशुओं के बारे में कुछ जरूरी बातें जानना महत्वपूर्ण है। 

माता-पिता बनना किसी भी कपल के लिए बेहद सुखद पल होता है। लेकिन बच्चा होने के साथ उनकी जिम्मेदारियां भी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। खासकर अगर आप पहली बार माता-पिता बने हैं तो ऐसी कई बातें होती हैं, जिनके बारे में आपको ज्यादा जानकारी नहीं होती है। कम जानकारी होने के कारण शिशुओं के बेहतर विकास के लिए आप सही कदम नहीं उठा पाते हैं और छोटी-छोटी बातों को लेकर परेशान रहने लगते हैं।

शिशु के बारे में जरूरी बातें

दूध पिलाएं

बेबी को हर 2 से 3 घंटे में दूध पिलाने की कोशिश करें, जिससे शिशु का पेट भरा रहे और वजन अच्छी तरह से उम्र के साथ बढ़ता रहे। 

डकार दिलाना

शिशु को दूध पिलाने के बाद कंधे पर लगाकर कम से कम 10 मिनट तक उसकी पीठ को हल्के हाथों से सहलाएं, जिससे बच्चे को डकार आ सके और दूध बाहर आने की संभावना कम हो सके। 

पेशाब पर दें ध्यान

शिशु दूध या सिर्फ लिक्विड डाइट पर रहते हैं, इसलिए जरूरी है कि वे एक दिन में कम से कम 6 से 7 बार पेशाब जरूर करें। पेशाब होना इस बात का संकेत होता है कि आपके बच्चे का पेट सही तरह से भर रहा है और उसका बेहतर ग्रेत हो रहा है। 

पोटी को न करें इग्नोर

शिशुओं के लिए एक दिन में कई बार पोटी करना या 2 से 3 दिनों में 1 बार पोटी करना, दोनों चीजें ही नॉर्मल हैं। इसलिए अगर शिशु सामान्य तरीके से पोटी कर रहा है तो इसमें कोई परेशानी की बात नहीं है। 

डायपर पहनाना

शिशुओं को पूरा दिन डायपर पहनाने से बचने की कोशिश करें। शिशु को डायपर फ्री टाइम देना बेहद जरूरी है, ताकि उनके डायपर के स्थान पर रेशेज होने का खतरा कम हो। 

हिचकी आना

बच्चों को हिचकी आना नॉर्मल बात है। शिशुओं को हिचकी आने पर घबराएं नहीं, बल्कि उन्हें कंधे पर लेकर हल्के हाथों से पीठ को थपथपाएं। 

खांसी आना

एक दिन में 2 से 3 बार शिशुओं को हल्की खांसी आना आम बात है। दरअसल शिशुओं की नाक में पपड़ी जमने के कारण ये समस्या होती है। ऐसे में आप उनकी नाक में नेजल ड्रॉप डाल सकते हैं, जिससे खांसी से आराम मिल जाएगा। 

दूध पिलाने की पॉजीशन

माताओं को कभी भी अपने शिशु को लेटाकर फीडिंग नहीं करवानी चाहिए। इस पॉजीशन में दूध पिलाने से शिशु को कान का इंफेक्शन होने का जोखिम बढ़ जाता है। 3 महीने से बड़े बच्चे को आप लेटाकर दूध पिला सकते हैं। 

शिशुओं को सुलाना

शिशुओं को हमेशा पीठ के बल सुलाना चाहिए। उन्हें कभी भी करवट या पेट के बल सुलाने से बचना चाहिए। 

रोना

शिशु अक्सर कोलिक दर्द के कारण जन्म के शुरुआती 3 से 4 महीने तक रोते हैं। ऐसी स्थिति में आप शिशु के पेट को राउंड शेप में हल्के हाथों से मसाज करें। ऐसा करने से शिसु को आराम मिलेगा। 

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