touristplace – अतुल्य छत्तीसगढ़: संस्कृति, सौंदर्य और समृद्धि का संगम https://chhattisgarhstate.com अतुल्य छत्तीसगढ़: संस्कृति, सौंदर्य और समृद्धि का संगम Sun, 14 Jul 2024 19:59:51 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.1 https://chhattisgarhstate.com/wp-content/uploads/2024/02/chhattsgarh-state-2-75x75.png touristplace – अतुल्य छत्तीसगढ़: संस्कृति, सौंदर्य और समृद्धि का संगम https://chhattisgarhstate.com 32 32 Chaiturgarh Mandir Chhattisgarh | चैतुरगढ़ छत्तीसगढ़ | Chaiturgarh Korba | https://chhattisgarhstate.com/chaiturgarh-mandir-chhattisgarh-chaiturgarh-chhattisgarh-chaiturgarh-korba/ https://chhattisgarhstate.com/chaiturgarh-mandir-chhattisgarh-chaiturgarh-chhattisgarh-chaiturgarh-korba/#respond Mon, 17 Jun 2024 12:47:32 +0000 https://chhattisgarhstate.com/?p=2515 छत्तीसगढ़ का चैतुरगढ़ किला अपनी वास्तुकला, इतिहास और खूबसूरती के लिए पर्यटकों के बीच विख्यात है। चैतुरगढ़ किले को लक्खा गढ़ किले के नाम से भी जाना जाता है। यह किला छत्तीसगढ़ के 36 किलों में से एक है और 5 किमी वर्ग के क्षेत्रफल में फैला हुआ है।

चैतुरगढ़ किला भारत के सबसे मजबूत प्राकृतिक किलों में से एक है और यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित है। यह किला 3,060 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और कोरबा जिले से 70 किमी की दूरी पर है। किले में महिषासुर मर्दिनी मंदिर भी स्थित है, साथ ही यह जगह विभिन्न जड़ी-बूटियों और वन्य जीव-जन्तुओं से भरी हुई है।

बरसात के समय किले की यात्रा करना खास मजेदार और रोमांचक होता है। चैतुरगढ़ किला राजा पृथ्वी देव द्वारा बनवाया गया था और इसका निर्माण कलचुरी संवत 1069 ईस्वी में हुआ था। किले में प्रवेश के लिए तीन द्वार हैं – मेनका, हुंकार और सिंह द्वार।

किले की ज्यादातर दीवारें प्राकृतिक रूप से निर्मित हैं, जबकि कुछ ही दीवारें बनाई गई हैं। किले में पांच तालाब हैं, जिनमें से तीन तालाब हमेशा पानी से भरे रहते हैं। ये तालाब गर्गज, सुखी और केकड़ा तालाब हैं।

चैतुरगढ़ पहाड़ों से तीनधारी और श्रृंगी झरने बहते हैं और जटाशंकरी नदी का उद्गम भी यहीं से होता है। किले की दीवारें विभिन्न आकार-प्रकार की हैं और प्रवेश द्वार वास्तुकला की दृष्टि से विशेष रूप से सुंदर हैं। इसमें कई स्तंभ और मूर्तियाँ भी हैं, साथ ही एक विशाल गुंबद है जो मजबूत स्तंभों पर टिका हुआ है।

महिषासुर मर्दिनी मंदिर समुद्र तल से लगभग 3,060 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और गर्मियों में भी यहां का तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस रहता है। इस वजह से इसे “छत्तीसगढ़ का कश्मीर” भी कहा जाता है।

महिषासुर मर्दिनी माता मंदिर को नगर शैली में बनाया गया है, जिसमें विशिष्ट योजना और विमान के साथ त्रिकोणीय आकार होता है। मंदिर के गर्भगृह में माता की 12 हाथों वाली मूर्ति है और आसपास हनुमान, काल भैरव और शनिदेव की मूर्तियाँ भी हैं।

चैत्र और कुमार के नवरात्रि में यहाँ भव्य मेले का आयोजन होता है जिसमें हजारों लोग शामिल होते हैं।

चैतुरगढ़ किले तक पहुंचने के लिए हवाई यात्रा से आप स्वामी विवेकानंद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहुंच सकते हैं। रायपुर से किले की दूरी 200 किलोमीटर है। ट्रेन द्वारा चैतुरगढ़ कोरबा रेलवे स्टेशन से लगभग 50 किलोमीटर और बिलासपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बस द्वारा चैतुरगढ़ कोरबा बस स्टैंड से 50 किलोमीटर और बिलासपुर बस स्टैंड से 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

यहां की प्राकृतिक खूबसूरती, पहाड़ों के बीच बसा किला, झरने और उनके रहस्य रोमांस, इतिहास, वास्तुकला और रहस्य में रुचि रखने वाले लोगों के लिए बहुत कुछ प्रदान करते हैं।

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अगर आप भी बना रहे है मैनपाट जाने का प्लान,मिस मत करे ये सारे जगह https://chhattisgarhstate.com/nullnull/ https://chhattisgarhstate.com/nullnull/#respond Sat, 08 Jun 2024 18:26:01 +0000 https://chhattisgarhstate.com/?p=2459 आये जानते है छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाले मैनपाट के बारे में , मैनपाट एक छोटा सा गांव है जिसे प्रकृति ने बेहद खूबसूरती से नवाजा है। हरे-भरे मैदान, खूबसूरत झरने और आश्चर्यजनक प्राकृतिक स्थल मैनपाट को अद्वितीय बनाते हैं। यह सरगुजा जिले के विंध्यवासिनी पर्वत पर स्थित है, जिसकी समुद्र तल से ऊंचाई लगभग साढ़े तीन हजार फीट है। यहां कई पर्यटन स्थल हैं जो सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। कम तापमान और सर्दियों में बर्फबारी की वजह से इसे छत्तीसगढ़ का शिमला भी कहा जाता है।

मैनपाट को छोटा तिब्बत भी कहा जाता है क्योंकि 1965 में भारत-चीन युद्ध के बाद तिब्बतियों को यहां शरणार्थी के रूप में बसाया गया था। इसलिए इसे मैनपाट कोटा वृद्धि भी कहते हैं। मैनपाट में घूमने के लिए बहुत कुछ है और यहां कई मनोरम स्थल हैं। अगर आप कभी मैनपाट आएं, तो इन खास जगहों को देखना न भूलें:

  1. टाइगर पॉइंट: यह जगह अपने झरनों और बंदरों के लिए प्रसिद्ध है। महादेव मोड नदी यहां लगभग 60 मीटर की ऊंचाई से गिरती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले यहां जंगल में बाघ दिखाई देते थे, इसलिए इसका नाम टाइगर पॉइंट पड़ा।
  2. जलजली पॉइंट: यहां की जमीन बिना भूकंप के भी हिलती है। अगर आप यहां उछलते हैं, तो जमीन भी हिलती है। यह प्राकृतिक करिश्मा देखने लायक है।
  3. उल्टा पानी: इस जगह का नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यहां पानी का बहाव ऊंचाई की तरफ होता है। सड़क पर खड़ी न्यूट्रल गाड़ी भी पहाड़ी की ओर खिंच जाती है।
  4. जलपरी पॉइंट: यह सबसे खूबसूरत झरनों में से एक है, जो लगभग 80 मीटर की ऊंचाई से गिरता है। घने जंगलों के बीच स्थित इस झरने तक पहुंचने के लिए आपको पैदल चलना होगा। जलपरी पॉइंट के मनोरम दृश्य सैलानियों को आकर्षित करते हैं।
  5. मैनपाट कार्निवाल: इस महोत्सव की शुरुआत 2012 में हुई थी। हर साल फरवरी में आयोजित इस उत्सव में स्कूल-कॉलेज के छात्र, स्थानीय कलाकार और छत्तीसगढ़ के कलाकार रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं।

दोस्तों, मैनपाट का सफर रोमांचक है। अगर आप इस जगह का दौरा करना चाहते हैं, तो साल के किसी भी महीने आ सकते हैं, लेकिन बारिश और ठंड के मौसम में इसकी खूबसूरती अपने चरम पर होती है। अगर आप प्राकृतिक सौंदर्य के साथ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का मजा लेना चाहते हैं, तो मैनपाट कार्निवाल के दौरान जरूर आएं।

हमें बताएं कि आपको मैनपाट की यह जानकारी कैसी लगी।

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अगर आप भी बस्तर घुमने जाने का बना रहे है प्लान तो इन जगहों को बिलकुल भी न करे मिस https://chhattisgarhstate.com/if-you-are-also-planning-to-visit-bastar-then-do-not-miss-these-places-at-all/ https://chhattisgarhstate.com/if-you-are-also-planning-to-visit-bastar-then-do-not-miss-these-places-at-all/#respond Fri, 07 Jun 2024 13:24:19 +0000 https://chhattisgarhstate.com/?p=2444 आये आपको बताते है बस्तर के टॉप-10 पर्यटन स्थलों के बारे में । ये ऐसी जगहें हैं जिन्हें देखे बिना बस्तर का सफर अधूरा है। वैसे तो बस्तर में घूमने लायक जगहों की कमी नहीं है, लेकिन आपको 10 ऐसे टूरिस्ट प्लेस बताने जा रहे हैं जिनकी खूबसूरती देख आप भी तारीफ किए बिना नहीं रह सकेंगे। सबसे पहले :-

तीरथगढ़ जलप्रपात:- जगदलपुर से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित तीरथगढ़ जलप्रपात छत्तीसगढ़ का सबसे ऊंचा वाटरफॉल है। यह खूबसूरत झरना कांगेर घाटी नेशनल पार्क में स्थित है। मूंगा बाहर नदी का पानी 300 फीट की ऊंचाई से पहाड़ीनुमा संरचना से नीचे गिरता है, जो इसे 10 झरनों का रूप देता है। इसकी मनमोहक छटा में पर्यटक खो जाते हैं और वापस जाने का मन ही नहीं करता।

कुटुमसर गुफा बस्तर की कुटुमसर गुफा भारत की सबसे गहरी गुफा मानी जाती है। यह एक भूमिगत गुफा है जिसकी खोज 1950 के दशक में की गई थी। इस गुफा के भीतर चूना पत्थर से प्राकृतिक रूप से विभिन्न आकृतियां बनी हुई हैं। यहां बहुत अधिक अंधेरा रहता है, और जब इन आकृतियों पर टोर्च की रोशनी पड़ती है तो यह चमक उठती हैं। इन आकृतियों को देखकर पर्यटक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। इस रहस्यमयी गुफा में रंग-बिरंगी अंधी मछलियां भी पाई जाती हैं।

चित्रकूट जलप्रपात दोस्तों, यह विश्व प्रसिद्ध चित्रकूट जलप्रपात छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा और सबसे चौड़ा वाटरफॉल है। इसे भारत का नियाग्रा भी कहा जाता है। इस झरने में 90 फीट की ऊंचाई से गिरता पानी इंद्रावती नदी की खूबसूरती पर चार चांद लगा देता है। वर्षा के दिनों में इसका जल रक्त लालिमा लिए होता है जबकि गर्मियों की चांदनी रात में यह बिल्कुल सफेद दिखाई देता है।

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान जगदलपुर से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान न सिर्फ अपने वन्यजीवों बल्कि कई प्राकृतिक आकर्षणों के लिए भी जाना जाता है। इस पार्क की स्थापना 1982 में की गई थी। आप इस अभियान में तेंदुआ, जंगली बिल्ली, चीतल, हिरण, लोमड़ी, गीदड़, जंगली सूअर और मगरमच्छ जैसी वन्य जीवों की प्रजातियों को देख सकते हैं।

चित्रधारा जलप्रपात बस्तर में कई झरने हैं, उनमें से चित्रधारा जलप्रपात भी एक प्रमुख झरना है। यह वाटरफॉल 50 फीट की ऊंचाई से गिरता है। बारिश और सर्दियों के दिनों में इसकी सुंदरता देखते ही बनती है। एक छोटी सी पहाड़ी नदी इस झरने का निर्माण करती है।

कैलाश गुफा कांगेर वैली नेशनल पार्क में तीन असाधारण गुफाएं हैं, जिसमें से कैलाश गुफा सबसे पुरानी गुफा है। इस गुफा की खोज 1994 में वाइस मार्शल ने की थी। गुफा के अंदर शिवलिंग है, इसलिए इसे कैलाश गुफा भी कहा जाता है।

नारायण हिल दोस्तों, नारायण हिल बस्तर की खूबसूरत जगहों में से एक है। घने जंगलों और चारों तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ यह स्थान चित्रकूट जलप्रपात से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। नारायण हिल की ऊंचाई से आसपास का दृश्य बहुत ही खूबसूरत नजर आता है। यहां आप ट्रैकिंग भी कर सकते हैं।

दलपत सागर झील बस्तर में झरनों के अलावा भी कई दर्शनीय स्थल हैं, इनमें से प्रमुख है जगदलपुर की दलपत सागर झील। यह छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है। इस झील के मध्य एक टापू बना हुआ है जो यहां का मुख्य आकर्षण माना जाता है।

तामड़ा घूमर जलप्रपात चित्रकूट जलप्रपात से दस किलोमीटर की दूरी पर तामड़ा घूमर जलप्रपात स्थित है। यह एक बारहमासी झरना है और चित्रकूट के रास्ते पर पहाड़ियों और घाटियों के बीच अपनी उपस्थिति दर्शाता है। बरसात के मौसम में इस झरने की खूबसूरती देखते ही बनती है।

दंतेश्वरी मंदिर और बस्तर पैलेस जगदलपुर का बस्तर पैलेस अपनी दीवारों और छत पर उत्कृष्ट नक्काशी के लिए जाना जाता है। यहां बस्तर का शाही परिवार निवास करता है। बस्तर राजमहल के मुख्य द्वार पर माता दंतेश्वरी का मंदिर है जो बस्तर के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। इस मंदिर का निर्माण 1800 में पूर्ण हुआ था।

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ऐसे पहुचे रायपुर के जंगल सफारी,कम पैसो में बन जायेगा आपका काम https://chhattisgarhstate.com/reaching-raipurs-jungle-safari-in-this-way-your-work-will-be-done-in-less-money/ https://chhattisgarhstate.com/reaching-raipurs-jungle-safari-in-this-way-your-work-will-be-done-in-less-money/#respond Thu, 06 Jun 2024 20:53:43 +0000 https://chhattisgarhstate.com/?p=2427 जंगल सफारी रायपुर से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। रायपुर रेलवे स्टेशन से आपको हर घंटे नया रायपुर के लिए बस मिल जाएगी। नया रायपुर जाने के लिए बस का किराया ₹30 है। आप अपने व्यक्तिगत वाहन से भी नया रायपुर जा सकते हैं, जहां पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है। कार की पार्किंग का चार्ज ₹50 है और बाइक का चार्ज ₹20 है।

जंगल सफारी में प्रवेश के लिए आपको पहले टिकट लेना होगा। यह नया रायपुर, अटल नगर में स्थित है। एंट्री के बाद आप टिकट काउंटर पर जा सकते हैं। जंगल सफारी सोमवार को बंद रहता है। भारतीय व्यस्कों के लिए टिकट ₹100 है, बच्चों के लिए ₹25 है और 12 वर्ष से कम उम्र के भारतीय बच्चों के लिए प्रवेश निशुल्क है। विदेशी नागरिकों के लिए टिकट ₹500 है और विदेशी बच्चों के लिए ₹400 है। फोटोग्राफी के लिए चार्ज ₹300 और वीडियोग्राफी के लिए ₹500 है। नौका विहार के लिए चार्ज ₹100 है।

जंगल सफारी के अंदर विभिन्न जानवरों को देखने के लिए बस सुविधा उपलब्ध है। सफारी के दौरान, गाइड आपको विभिन्न जानवरों और उनकी विशेषताओं के बारे में बताएगा। यहाँ पर आप शेर, बाघ, भालू, चीतल, काले हिरण आदि देख सकते हैं। सफारी का अनुभव काफी रोमांचक है क्योंकि जानवर खुले में रहते हैं और आप बस के अंदर सुरक्षित रहते हुए उन्हें देख सकते हैं।

सफारी के बाद आप जु (चिड़ियाघर) भी जा सकते हैं, जिसका प्रवेश शुल्क ₹50 है। वहाँ विभिन्न प्रकार के जानवर और पक्षी देखने को मिलते हैं। सफारी और जु घूमने के लिए आपको लगभग 2-3 घंटे का समय चाहिए। सफारी सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक खुला रहता है।जंगल सफारी की यात्रा के दौरान मास्क पहनें, हैंड सैनिटाइजर का उपयोग करें और सामाजिक दूरी का पालन करें। सफारी में घूमने के दौरान पानी की बोतल साथ रखें ताकि आप सुरक्षित और स्वस्थ रहें।

खबर यह भी है:- X(ट्वीटर) पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फॉलोवर्स पहुंचे 100 मिलियन के पार,

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