एकीकृत महिला एवं बाल विकास विभाग के आंगनबाड़ी केंद्रों पर महिला व बच्चों के कुपोषण को लेकर तरह-तरह की योजनाएं चला रही है और हर वर्ष करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन अभी भी नौनिहालों की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से फेल नजर आ रही है मोहला मानपुर अम्बागढ़ चौकी जिले में सारे आंगनवाड़ी केंद्र सुचारू रूप से संचालित होते हैं लेकिन कई ऐसे आंगनबाड़ी केंद्र भी हैं जिनकी स्थिति देखकर प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान लग जाते हैं।

मामला मानपुर ब्लाक के ग्राम पंचायत मोरचुल के आश्रित ग्राम हालेपायली रायगड़िया पारा का है, जहां आंगनबाड़ी केंद्र भवन का निर्माण सालो से अधूरा है जिसके वजह से अत्यंत जर्जर और बदहाल एक कच्चे मकान में आंगनबाड़ी किराये से संचालित हो रहा है, यह एक मात्र आंगनबाड़ी नही है इस क्षेत्र के आधा दर्जन आंगनबाड़ी केंद्र किराये के मकान में चल रहा है यही नही जिले के 69 ऐसे आंगनबाड़ी केंद्र है जिसे डिस्मेंटल घोषित किया है पर अब तक नए भवन की किसी तरह की कोई व्यवस्था नही की गई है भले ही जिला प्रशासन पोट्ठु योजना चलाने में व्यस्त रहे पर जिससे नौनिहाल बच्चों के सिर पर खतरा मंडराता हो उस पर ध्यान ही नही दिया जा रहा है।
औंधी तहसील के दर्जनों गांव में आंगनबाड़ी केंद्र भवन ही नही है पर जब से आंगनबाड़ी केंद जो संचालित हो रहे है, किसी न किसी के घर किराये से वो भी बिना किसी सुविधा के। ,आज भी बड़गांव,तोड़के,डोमिकला, जामड़ी ,गुड़ारास गांव के नौनिहालों को आंगनबाड़ी भवन के लिए तरसना पड़ रहा है । सरकार चाहे जो भी आये पर नसीब इनका सिर्फ किराये के मकान में बैठकर भविष्य गढ़ना है।

इन आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है। पानी, बिजली, शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में आखिर बच्चों का शारीरिक, मानसिक विकास कैसे होगा । बरसात के दिनों में तो बच्चों को बैठने में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है,ज्यादा बारिश हो गई तो बच्चो को छुट्टी देने तक कि नोबत आ जाती है और जो मूलभूत सुविधाएं बच्चो को मिलना चाहिए वह नहीं मिल पा रही है।ऐसे में शिक्षा के अधिकार का हनन होना कहा जा सकता है।
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